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इकाई-8: विशिष्ट पुस्तकालय एवं सूचना केन्द्र (Special Libraries and Informal Centers)

इकाई-8: विशिष्ट पुस्तकालय एवं सूचना केन्द्र 

2.1. भारत में विशिष्ट पुस्तकालयों का विकास 3. विशिष्ट एवं सामान्य पुस्तकालयों में भिन्नताएँ
विशिष्ट पुस्तकालयों के प्रकार 4.1. अंतर्राष्ट्रीय पुस्तकालय 4.2. राष्ट्रीय (विषय/कार्य परक) पुस्तकालय 4.3. सेवा परक अन्य पुस्तकालय 4.4. प्रलेखन केन्द्र
4.5. विशिष्ट पुस्तकालयों का संगठन 5. उद्देश्य
5.1. नवीन साहित्य का सर्वेक्षण एवं मूल्याँकन करना 5.2.
पुस्तकों, सूचना एवं आधार सामग्री का अर्जन 5.3. पुस्तकों, सूचना एवं आधार सामग्री का प्रस्तुतीकरण 5.4. पुस्तकों, सूचना एवं आधार सामग्री का संग्रहण
5.5. पुस्तकों सूचना एवं आधार सामग्री का पुनरुत्पादन 6. विशिष्ट सेवायें
6.1. पुस्तकों का आदान प्रदान 6.2. अन्तर्रापुस्तकालयीन आदान 6.3. आवधिक प्रकाशनों का संचरण 6.4. पत्र एवं फोन द्वारा प्रश्नों के उत्तर प्रदान करना
6.5. सन्दर्भ सेवा 7. प्रलेखन
7.1 सूचना केन्द्रों का विकास
8. सूचना केन्द्रों का विकास

8.1. विशिष्ट पुस्तकालय एवं सूचना प्रलेखन केन्द्रों के अभिलक्षण 

8.2. सूचना केन्द्रों के प्रकार
8.2.1. डेटा सेन्टर्स 8.2.2. सूचना विश्लेषण केन्द्र
8.2.3. सूचना प्रसारण केन्द्र 9. सारांश 10. अभ्यासार्थ प्रश्न
11. विस्तृत अध्ययनार्थ ग्रन्थसूची। 
1. विषय प्रवेश
बीसवीं शताब्दी में कई प्रकार के पुस्तकालयों का उदय हुआ है लेकिन जैसा विशिष्ट पुस्तकालयों का विकास वितीय महायुद्ध के बाद हुआ हैं ऐसा पिछले दो अथवा तीन शताब्दियों में भी नहीं हुआ। अब आधुनिक युग में समाज के प्रत्येक वर्ग के लिये पुस्तकालय स्थापित हो रहे है। विशिष्ट पुस्तकालयों के संगठन में तकनीकी विविधताएँ है ऐसे पुस्तकालयों के संगठन, संचालन, विधियाँ, नई तकनीकों का उपयोग, पुस्तकालय संग्रह एवं कर्मचारियों में पायी जाने वाली विविधता का अध्ययन करना आवश्यक है सभी स्थानों पर पुस्तकालय के विविध रूप दिखाई पड़ते है। जिसमें विशिष्ट पुस्तकालय, विश्वविद्यालय, महाविद्यालय एवं विद्यालय पुस्तकालय मुख्य है।
। विशिष्ट पुस्तकालय वे पुस्तकालय है जिनमें विशिष्ट विषय अथवा विषयों पर ही पाठ्य सामग्री उपलब्ध होती है। विशिष्ट पुस्तकालयों का औचित्य इसलिये भी है कि सार्वजनिक अथवा शैक्षणिक पुस्तकालय केवल सामान्य पाठकों की आवश्यकताओं को पूरा कर पाते हैं उनमें अनेक विषयों पर पाठ्य सामग्री एकत्रित की जाती हैं लेकिन विशिष्ट पाठकों के लिये जिन्हें कुछ विषयों पर आधुनिक साहित्य चाहिये। इस प्रकार के पुस्तकालय ही उपयोगी सिद्ध होते है कुछ ऐसे पाठक वर्ग भी है जो अपनी विशेष परिस्थितियों, सीमाओं, शोध अथवा विशेषताओं के कारण सामान्य पुस्तकालयों का उपयोग नहीं कर पाते है। दूसरी ओर सामान्य पुस्तकालयों में उनको अनुकूल पाद्य सामग्री नहीं मिल पाती है इन पाठकों की विशेष प्रकार की अध्ययन सामग्री तथा पुस्तकालय सेवा विशिष्ट पुस्तकालयों तक ही सीमित रहती है। अनेक बार सार्वजनिक पुस्तकालय विशेष अनुभाग की स्थापना कर कुछ विशिष्ट पाठक वर्गों को आवश्यक सेवाएं प्रदान करते हैं किन्तु पुस्तकालय सेवाओं का किसी वर्ग विशेष के लिये अनुकूल तब ही बनाया जा सकता है जब उनके लिये स्वतन्त्र विशिष्ट पुस्तकालय हो। कोई भी व्यवसाय अथवा सरकारी संस्थान जो किसी विशेष क्षेत्र में अपना स्थान बनाये हुए है उनको विशेष प्रकार की सूचना एवं पुस्तकालय सेवायें उपलब्ध कराने के लिये ही इन विशिष्ट प्रकार के पुस्तकालयों की आवश्यकता होती है। विशिष्ट पुस्तकालय जन समुदाय के विशिष्ट विषय पर अभिरुचि प्राप्त व्यक्तियों को ही सेवा प्रदान करता है। प्रथम विश्व युद्ध के बाद उद्योग व वाणिज्य क्षेत्र का ध्यान इस ओर गया कि टेक्नीकल कर्मचारियों के लिये ऐसे पुस्तकालय एवं सूचना सेवा की आवश्यकता है लेकिन ऐसे पुस्तकालयों का मुख्य विकास वितीय विश्व युद्ध के बाद हुआ। विशिष्ट पुस्तकालयों के प्रसार में आधुनिक तकनीकी साहित्य के प्रसार का प्रभाव भी झलकता है।

भारत में विशिष्ट पुस्तकालयों का विकास

के.जी. बैकवेल के अनुसार "विशिष्ट पुस्तकालय एक ऐसा पुस्तकालय है जो किसी समूह विशेष को सेवा प्रदान करता है जैसे किसी प्रतिष्ठान के कर्मचारी, किसी शासकीय विषय के कर्मचारी अथवा किसी व्यवसायिक अनुसंधान के कर्मचारी और सदस्य। ऐसा पुस्तकालय आवश्यक रूप से सूचना से सम्बन्धित होता है तुलनात्मक दृष्टि से विशिष्ट पुस्तकालय सामान्यत: छोटे पुस्तकालय होते है जो थोड़े से विशिष्ट व्यक्तियों की आवश्यकताओं की पूर्ति करते है। साधारणतया इस प्रकार के पुस्तकालय किसी विषय विशेष अथवा विषयों के विशिष्टता प्राप्त हुए होते है। 

2. विशिष्ट पुस्तकालय का इतिहास

विशिष्ट पुस्तकालयों का विकास 20वीं शताब्दी के आरम्भ से ही हो गया था। लेकिन विकास की तीव्र गति द्वितीय विश्वयुद्ध के पश्चात आई है। विशिष्ट पुस्तकालयों की आवश्यकता किसी भी देश के आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, औद्योगिक वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिक विकास पर निर्भर करती है जिन देशों में आर्थिक तथा सामाजिक विकास अधिक हुआ है। वहाँ इस प्रकार के पुस्तकालयों की माँग अधिक रही है। जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका, फ्रांस, जापान एवं जर्मनी में जहाँ वैज्ञानिक विकास अधिक हुआ है वहाँ पर ऐसे पुस्तकालयों की बहुतायत है ऐसे पुस्तकालय सरकारी विभाग, निदेशालय, ब्यूरोज, सोसायटियाँ, व्यावसायिक संस्थाएँ, संघ (Associations), अस्पताल, समाज कल्याण केन्द्र इत्यादि से जुड़े रहते है। इन्हीं उपरोक्त संस्थाओं से जुड़े विशिष्ट पाठकों के लिये ऐसे पुस्तकालयों की आवश्यकता होती है। विशिष्ट पुस्तकालयों की कार्यशैली, उद्देश्य, साहित्य को संग्रहित करने की विधि एवं उसका तकनीकी प्रस्तुतीकरण अन्य पुस्तकालयों से काफी भिन्न होता है।

विशिष्ट एवं सामान्य पुस्तकालयों में भिन्नताएँ विशिष्ट पुस्तकालयों के प्रकार

। विशिष्ट पुस्तकालयों का विकास सर्वप्रथम संयुक्त राज्य अमेरिका में हुआ सन् 1909 में संयुक्त राज्य अमेरिका में केवल पचास विशिष्ट पुस्तकालय थे जिनकी संख्या बढ़कर 1935 में दो हजार एवं 1950 में पाँच हजार हो गई। 1968 में प्रकाशित एक निर्देशिका के अनुसार संयुक्त राज्य अमेरिका एवं कनाडा में ग्यारह हजार विशिष्ट पुस्तकालय थे। आज इन देशों में अनुमानत: बीस हजार से भी अधिक विशिष्ट पुस्तकालय विद्यमान है ।
डी. बी. आरनोल्ड ने विशिष्ट पुस्तकालयों की परिभाषा इस प्रकार दी है कि ये वे पुस्तकालय है जो एक प्रकार के विषय तथा एक ही प्रकार के उद्देश्य के लिये स्थापित किये गये हैं। ऐसे पुस्तकालय अपने विशिष्ट विषय अथवा विषयों पर पाद्य सामग्री उपलब्ध करवाते हैं। विशिष्ट पुस्तकालय किसी विशाल विश्वविद्यालय अथवा सार्वजनिक पुस्तकालय से जुड़े भी हो सकते है। इनका विषयानुसार विकास किया जाता है। इनसे जुड़े वे प्रलेखन एवं सूचना केन्द्र (Information centres) आ जाते है जो विषयों पर पाठ्य सामग्री एकत्रित करते हैं।
विशिष्ट पुस्तकालयों की पाठ्य सामग्री संग्रह अन्य पुस्तकालयों से भिन्न होती है जैसे पाण्डुलिपियाँ, नक्शे, दृश्य-श्रव्य सामग्री, माईक्रोफॉर्मस, विडियो टेप रिकार्डिंग स्लाईड्स, प्रतिवेदन (Reports), पेटेन्ट्स इत्यादि पाठ्य सामग्री की संख्या पुस्तकों की अपेक्षा अधिक होती है साथ ही इनके संग्रह में पत्र-पत्रिकाओं के पिछले अंक भी अधिक पाये जाते है जबकि शैक्षणिक पुस्तकालयों में पुस्तकों की संख्या अधिक होती है।
मेडिकल, इंजीनियरिंग, बिजने पुस्तकालय भी विशिष्ट पुस्तकालयों की श्रेणी में ही आते है इन विशिष्ट पुस्तकालयों को विशिष्ट पुस्तकालय (Special Library) टेक्नीकल लाइब्रेरी (Technical Library) एवं औद्योगिक पुस्तकालय (Industrial Library) भी कहते है। 
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